प्यार वो मिटास में लिपटी मिटी छुरी है जो सिर्फ घाव देती है सारी जिंदगी इन्सान उसी दर्द के नशे में डूबा रहता है तिल-तिल मिटाता रहता है और उसे पता भी नहीं चलता
प्राय: ऐसे प्यार को हम प्यार समझने की भूल कर बैठते हैं, पर वास्तव में वह प्यार होता ही नहीं है! प्यार तो केवल वही और केवल वही होता है, जो सुख के सागर में गोते लगवाता है!
1 टिप्पणी:
प्राय: ऐसे प्यार को
हम प्यार समझने की भूल
कर बैठते हैं,
पर वास्तव में
वह प्यार होता ही नहीं है!
प्यार तो केवल वही
और
केवल वही होता है,
जो सुख के सागर में
गोते लगवाता है!
एक टिप्पणी भेजें